bhaiya duj भैया दूज पर राखी

 हिंदू धर्म में नाना प्रकार के बार त्योहार तिथि अनेक प्रकार की मान्यताओं पर लोक दंत कथाओं पर कहानियां बना दी गई दीपावली के उत्सव उसके बाद गोवर्धन पूजा फिर भैया दूज बहन भाई को राखी बांधे तो भाई की उम्र लंबी हो जाए यमराजा प्रसन्न हो जाए परंतु यह सब फालतू है झूठी बातें बहुत से भाई बहन पूजा करते करते ही मर जाते हैं कोई लाभ नहीं मिलता अभी रक्षाबंधन पर न जाने कितने भाई बहन मारी गई कहीं बहन राखी बांध कर आ रही थी एक्सीडेंट में मर गई तो कहीं भाई राखी बंधा कर आ रहा था  रास्ते में ही रह गया एक्सीडेंट में मारा गया फिर इन त्योहारों को क्यों मनाया जाता है जब ईनसे कोई लाभ ही नहीं मिलता यह सिर्फ एक पाखंड पूजा है परमात्मा के लाभ से हमें वंचित करने के लिए मूर्ख बना कर अन्य पुजा पर लगाया गया है गीता में कहा है इच्छाओं के मारे हुए मूर्ख लोग देवताओं की उपासना करते  और अधोगति को प्राप्त होते हैं वेद और गीता में पूज्य परमात्मा कबीर भगवान गीता कहती है अर्जुन तुम मुक्त चाहते हो तो मेरे स्तर की सभी पुजाएं मुझे दे दो और फिर एक उस समरथ परमात्मा की शरण में चले जाओ जो कभी न मरने वाला है गीता के आठवें अध्याय में नोवा श्लोक वह समरथ परमात्मा जिसका सर्वे ब्रह्मांड ऊपर राज है वह काव्यम भगवान है यह भी कहा है  कबीर परमेश्वर की सतगुरु से लेकर सत् भगती की जाए तो भयंकर से भयंकर असाध्य रोग भी समाप्त हो सकता है क्योंकि रोग हमारे पाप कर्मों से आते हैं और सत भक्ति से पाप कर्म समाप्त हो जाते हैं रोग समाप्त हो जाते है आज  भक्ति सेेे लाभ हो रहा है तो वे सत भक्ति सिर्फ संत रामपालजी महाराज के पास में पास  मैं है जिसे असाध्य रोग कैंसर करोना सभी बीमारियां दूर हो जाती है और सबसे बड़ी बात  मोक्ष प्राप्त होता है

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